पंचांग (संस्कृत: पञ्च — पाँच, अंग — अंग) भारतीय खगोलीय परंपरा पर आधारित प्राचीन हिंदू कैलेंडर है। यह आकाशीय पिंडों की स्थिति सारणीबद्ध रूप में प्रस्तुत करता है; शुभ और अशुभ समय निर्धारित करने के लिए ज्योतिषी, पुरोहित और भक्त इसका उपयोग करते हैं।
सूर्य और चन्द्रमा के बीच कोणीय दूरी ही तिथि है। एक चन्द्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष और 15 कृष्ण पक्ष। पर्व और व्रत की तिथि निर्धारण में यह मुख्य घटक है।
राशिचक्र को 27 भागों में विभाजित किया गया है, प्रत्येक 13°20'। चन्द्रमा प्रतिदिन लगभग एक नक्षत्र पार करता है। जन्म नक्षत्र — जन्म के समय चन्द्रमा जिस नक्षत्र में होता है, वह व्यक्ति के स्वभाव को प्रभावित करता है।
सूर्य और चन्द्रमा की स्थितियों से गणित द्वारा निकाला गया योगफल। कुल 27 योग होते हैं; प्रत्येक उस दिन के स्वभाव को प्रभावित करता है ऐसी मान्यता है।
तिथि का आधा भाग करण कहलाता है। प्रत्येक तिथि में दो करण होते हैं; एक चन्द्र मास में 60 करण। विशेष कर्म और अनुष्ठान के लिए उपयुक्त समय निकालने में प्रयुक्त।
सात वार सात ग्रहों से जुड़े हैं: रविवार (सूर्य), सोमवार (चन्द्र), मंगलवार (मंगल), बुधवार (बुध), गुरुवार (गुरु), शुक्रवार (शुक्र), शनिवार (शनि)। प्रत्येक वार की अपनी विशेष ऊर्जा होती है।
शुद्धता के बारे में: Bhakti5 लाहिरी अयनांश और VSOP87 जैसी उच्च-शुद्धता खगोलीय विधियों से सभी पंचांग घटक स्वयं गणना करता है। सूर्योदय-निर्भर समयों के लिए आपके स्थान (अक्षांश/रेखांश) के अनुसार समायोजन किया गया है।